अफगानिस्तान छोड़कर भाग गये थे राष्ट्रपति अशरफ घनी, अब सामने आकर दिया ये बड़ा बयान

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आपको तो मालूम ही होगा कि इन दिनों में हमने अफगानिस्तान में किस तरह की स्थिति को बदलते हुए देखा है. कही न कही स्थिति जो पिछले बीस वर्षो से मेनेज करके रखी हुई थी वो देखते ही देखते समाप्ति की तरफ पहुँच गयी और महज 15 दिनों के संघर्ष के बाद में तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान के ऊपर कब्जा कर लिया. इसकी कल्पना किसी ने भी नही की थी और अब इन सबके बीच में राष्ट्रपति अशरफ घनी भी देश छोड़कर के दो दिन पहले ही भाग गये थे. लम्बे वक्त के बाद में वो फिर से सामने आये है.

देश में स्थिति और खराब न हो, इसलिये छोड़ दिया
अशरफ घनी ने अफगानिस्तान छोड़ने के लगभग दो दिन बाद में अपनी तरफ से सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया है जिसमे उन्होंने कहा है कि अगर वो काबुल को न छोड़ते तो फिर उनकी वजह से असंख्य लोगो की जान चली जाती. मेरे सामने भी उस वक्त एक चुनौती थी कि मैं महल में रुकूँ या फिर चला जाऊं अगर रूकता तो उनका सामना करता मगर कई लोगो की जान चली जाती, इस रक्त बहने से रोकने के लिए मेने सब कुछ छोड़कर के चले जाने का निर्णय किया.

अब वीपन्स के दम पर ताकत के दम पर तालिबान ने अफगानिस्तान को कब्जा कर लिया है. इस तरह की सत्ता को विश्व में कभी भी अपनाया नही गया है. तालिबान के हिस्से ही अब अफगानिस्तान के लोगो की सुरक्षा और आत्मसम्मान का जिम्मा है. अशरफ घनी ने आगे तालिबान से महिलाओं के लिए काम करने और देश के लिए काम करने के लिए स्पष्ट योजना बनाकर काम करने की रिक्वेस्ट की है. मगर हर कोई जानता है तालिबान की मंशा असल में क्या है?

दुनिया भर में हो रही अशरफ घनी की आलोचना
आज से कुछ हफ्तों पहले तक अशरफ अफगानिस्तान के सबसे शक्तिशाली नेता थे और उनके अंडर में पूरे तीन लाख लोगो की सेना था जिसकी मदद से वो चाहे जो कर सकते थे लेकिन हर मोर्चे पर उन्होंने हार पर हार ही देखी और कही न कही ये उनकी अंतिम परिणिति बनकर के उनके सामने आया है.

अब इस तरह की पोस्ट और बयान के जरिये चाहे वो अपनी नाकामयाबी और कमजोरी को कितना ही छुपाने की कोशिश करे लेकिन सच तो अंत में यही है कि वो अपनी ही जनता को धोखा देकर के भाग चुके है.

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