जीत गया तालिबान, भारत और अमेरिका के लिये बड़ा झटका

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आपको मालूम ही होगा कि अफगानिस्तान में इन दिनों में किस तरह के हालात बने हुए है. लोग इसके कारण से काफी अधिक चिन्तित्त है और कही न कही अधिकतर लोग इस मामले पर अपनी तरफ से रूख भी स्पष्ट कर चुके थे कि क्या करना है और क्या नही करना है? हालाँकि अभी भी लोकतंत्र के समर्थक देशो को ये उम्मीद तो थी कि आने वाले वक्त में अफगान सरकार और वहाँ की फ़ोर्स तालिबान को फिर से पीछे धकेल देगी लेकिन ऐसा नही हुआ. एक के बाद में एक बड़े प्रांत ये लोग जीतते ही चले गये.

तालिबान ने सीज किया काबुल, अशरफ गनी देने जा रहे है इस्तीफ़ा
आखिरकार एक के बाद में एक सारे शहर जीतते हुए तालिबान के लोग अफगानिस्तान की राजधानी काबुल तक पहुँच गये और वहां पर पहुँचने के बाद में उन्होंने पूरे काबुल को एक तरह से सीज कर दिया. इसके बाद में अफगान सरकार और वहां के राष्ट्रपति को ये समझ में आ गया कि अब हमारे पास में कुछ भी नही बचा है और हालात काबू से बाहर निकल चुके है. इस कारण से रिपोर्ट्स के अनुसार अशरफ गनी अब इस्तीफा देने जा रहे है.

यानी अब हम ये मान सकते है कि अफगानिस्तान में अरबो खरबों डॉलर खर्च करके जो एक लोकतांत्रिक सरकार खड़ी की गयी थी उसे महज कुछ ही हफ्तों के भीतर तालिबान ने अमेरिका के बाहर जाते ही फिर से जीत लिया है और अब अफगान लोगो के जीवन का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है जिसकी कल्पना शायद उन्होंने आज से कुछ वर्षो पहले तो कभी की ही नही होगी.

मुल्ला बरादर बनेगा अफगानिस्तान का नया राष्ट्रपति, जल्द संभाल सकता है कमान
अभी खबरों के मुताबिक़ अफगानिस्तान में ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर की प्रक्रिया चल रही है और अफगान सरकार अपने आपको इनके सामने झुका चुकी है, जिसके चलते हुए सारी शक्तियां तालिबान को सौंप दी जायेगी और मुल्ला बरादर आज शाम या फिर कल सुबह होते होते अफगानिस्तान का नया राष्ट्रपति बन सकता है.

भारत और अमेरिका जैसे लोकतंत्र के समर्थक देशो के लिए ये एक बड़े झटके की तरह है. इसके बाद में ये तय माना जा रहा है कि भारत अब अपने निवेश के कार्यो को अफगानिस्तान में आगे नही बढ़ा पायेगा और न ही ट्रेड रूट्स को लेकर के अपने प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ा पायेगा क्योंकि तालिबान एक भरोसेमंद संगठन के रूप में नही देखा जाता है.

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