रात भर सो नही पाये उपराष्ट्रपति वेंकेया नायडू, आँखों से बहने लगे आंसू

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राष्ट्रपति के बाद में देश के दुसरे संविधान के हिसाब से बड़े और शक्तिमान नागरिक उपराष्ट्रपति होते है जो आज की तारीख में वेंकेया नायडू है. जिस तरह से वो काम कर रहे है वो अपने आप में अद्दभुत है क्योंकि उनके कार्यकाल में कई इम्पोर्टेन्ट क़ानून पास हुए है, आखिर वो राज्यसभा के अध्यक्ष भी तो होते है और इस कारण से उनकी क्रेडिबलिटी और उनका काम काज भी काफी अधिक बढ़ जाता है. मगर कई बार ये कामकाज इन्सान के ऊपर बहुत ही बड़ा बोझ सा बन जाता है और ये बात हम भी बखूबी जानते है.

राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे से दुखी है वेंकेया नायडू, छलक पड़ी आँखे
अभी हाल ही में पेगासस से लेकर कई और विधेयक और सदन प्रक्रियाओं को लेकर के विपक्ष ने राज्यसभा में जमकर के हंगामा किया और इस दौरान सदन की गरिमा का भी कोई ख्याल नही रखा. बड़े बड़े सभासदो को एक तरह से बेज्जती मह्सूस हुई. राज्यसभा के सभापति होने के बावजूद खुद उपराष्ट्रपति वेंकेया नायडू यहाँ पर कुछ भी नहे कर पाए और मजबूर सा महसूस करते रहे. वेंकेया  नायडू कहते है कि वो सदन के लोगो के बर्ताव के कारण से रात भर सो तक नही पाए थे.

उन्होंने जब इस मामले में सदन में अपना कथन पढ़ा तो काफी भावुक होते नजर आये. उन्होंने कहा कि सदन में जो कुछ भी हुआ है उसकी निंदा करने के लिए तो मेरे पास में शब्द ही नही है. संसद हमारे लोकतंत्र का पवित्र मंदिर है और इस पर आंच नही आने दे सकते है. मैं बड़े दुःख के साथ कह रहा हूँ कि जो भी प्रतिद्वंदिता की भावना के साथ में सदन की गरिमा भंग की गयी वो बहुत ही ज्यादा चिंताजनक है. उपराष्ट्रपति ने देश की  संसद को मंदिर और गुरुद्वारे के समान ही पूजनीय स्थल बताया.

अपनी मांग के लिए सरकार को नही कर सकते मजबूर
उपराष्ट्रपति ने फिर से सदस्यों के द्वारा किये गये हंगामे पर अपनी तरफ से दुःख जताते हुए कहा कि आप बात रख सकते है लेकिन अपनी मांग मनवाने के लिए इस तरह से सरकार को आप बाध्य नही कर सकते है.

सिर्फ उपराष्ट्रपति महोदय ही नही बल्कि देश के और भी कई बड़े बड़े लोग है और मंत्री आदि है जो ऐसे लोगो पर कार्यवाही की मांग कर रहे है जिन्होंने अपने हिसाब से सदन न चलने के कारण उसे सर पर ही उठा लिया.

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