कांग्रेस ने अब एक ऐसी डिमांड कर दी है, जिससे जनरल केटेगरी वालो की हालत खराब हो जायेगी

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अभी आपको मालूम ही है कि सदन का मानसून सत्र चल रहा है और कई मुद्दे है जो उठाये जा रहे है. कही न कही लोगो के लिए इससे फायदा करवाने की कोशिश ही की जा रही है ताकि आम लोगो का जीवन सुलभ हो सके. इस सम्बन्ध में आपको पता हो तो मोदी सरकार ने ओबीसी सम्बंधित विधेयक भी लोकसभा से पास करवाया है जिसमे राज्यों को ओबीसी की गणना और पहचान की पॉवर दी जा रही है, मगर इसी बीच कांग्रेस ने एक ऐसा मुद्दा उठाया है जो काफी अधिक हैरान करने वाला है.

कांग्रेस ने की डिमांड, आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा को हटाया जाए
अभी हाल ही में कांग्रेस ने अपने सदन नेता अधीर रंजन चौधरी के माध्यम से सदन में ये मांग उठायी है कि अभी जो ये आरक्षण के ऊपर 50 प्रतिशत की सीमा लगी हुई है यानी सिर्फ आरक्षण सिर्फ 50 प्रतिशत तक सीट्स पर ही दिया जा सकता है उसे हटा लिया जाए ताकि मराठा आदि जो भीअभी  समुदाय है उनको भी इसका लाभ दिया जा सके. कांग्रेस ने एक तरह से देश में बेहिसाब आरक्षण लाने की मांग ही कर दी है.

 

परिणाम हो सकते है बुरे, जनरल वर्ग वालो में और अधिक मुश्किलें बढ़ेगी
अगर ऐसा सरकार कर देती है तो फिर इसके परिणाम जनरल वर्ग वाले लोग जिनके पास में कोई भी आरक्षण नही होता है उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती है क्योंकि पहले ही उनके पास में बहुत ही कम सीट्स बचती है जिन पर वो आपस में कम्पीट कर पाते है और अगर मान लेते है ये कोटा बढकर के 70 प्रतिशत हो जाता है तो जो लोग खुले मैदान में बिना रिजर्वेशन वाली सीट के लिए कम्पीट करेंगे वो तो सिर्फ और सिर्फ 30 प्रतिशत ही बच जायेगी.

ऐसे में जनरल वर्ग से जुड़े लोगो के लिए सरकारी नौकरी पाना और भी अधिक मुश्किल हो सकता है. हालाँकि आंकड़ो में हेर फेर करके इसे भी ठीक ठहराया जा सकता है लेकिन क्या ये बात ठीक नही है कि अगर देश में आरक्षण की सीमा और अधिक बढ़ायी जाती है तो एक फेयर कम्पीटीशन जो विभिन्न लोगो के बीच में होता है उसमे एक और बड़ी दिक्कत खड़ी हो जायेगी और कुछ वर्ग विशेष के लोगो को सिर्फ राजनीति के कारण एडवांटेज मिल जाएगा जबकि कई लोग पीछे रह सकते है.

अभी मोदी सरकार ने इस पर कुछ भी कहा नही है लेकिन कही न कही अगर इस तरह की बात सदन में उठती है तो फिर जनरल वर्ग के लोग काफी अधिक नाराज जरुर हो सकते है इसमें कोई  भी शक नही है.

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