बायडन ने तोड़ा भारत का बरसो पुराना सपना, दिया बड़ा झटका

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भारत ने पिछले कुछ समय में अपनी काफी बड़ी पालिसी शिफ्ट को दर्शाते हुए नजर आया है. रूस की तरफ से अपना ध्यान हटाकर के धीरे धीरे हमने अपना  फोकस अमेरिका की तरफ किया है ताकि विश्व शक्ति के साथ में कंधे से कंधा मिलाकर के चला जा सके लेकिन हाल ही में अमेरिका की तरफ से जो बयान सामने आ रहा है वो भारत के कुछ हद तक फेवर में नही ही जा रहा है, क्योंकि इससे भारत ने दशको से जो एक सपना संजोकर के रखा है वो टूटते हुए नजर आ रहा है.

बायडन ने किया पालिसी में बदलाव, भारत को वीटो पॉवर दिलवाने के पक्ष में नही
अभी हाल ही में अमेरिका ने अपने पालिसी में एक बड़ा बदलाव किया है जिसके तहत अब वाइट हाउस भारत को संयुक्त राष्ट्र की स्थायी सदस्यता  एक बार के लिए दिलवाने के पक्ष में फिर भी आ सकता है लेकिन अभी जो वीटो पॉवर है वो पांच देशो के अलावा किसी छठे देश को दिलवाने के पक्ष में नही है. ऐसे में कही न कही भारत के लिए ये वीटो पॉवर बनने का सपना टूट जाने के जैसा है जो बिलकुल भी ठीक नही है.

पिछले राष्ट्रपति के कार्यकाल में अमेरिका पक्ष में था
वो टाइम जब अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट माईक पोम्पियो थे और राष्ट्रपति ट्रम्प हुआ करते थे उन दिनों में अमेरिका भारत को वीटो पॉवर मिलने के पक्ष में था. ऐसे में फ्रांस और बाकी अमेरिकी समर्थक देश अपने से भारत के पक्ष में थे ही, रूस भारत की विरोध करता नही और चीन को बस एक काबू में करना बचा था. ऐसे में पिछले कार्यकाल में भारत के लिए बेहतर अवसर था.

भारत दावेदारी का कारण भी बताता है
आज भारत अगर वीटो की दावेदारी यूएन में करता है तो इसके पीछे कई कारण है. जैसे आज विश्व की आबादी का 17 प्रतिशत हिस्सा भारत में रहता है, भारत के पास में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना है, भारत एक परमाणु शक्ति तो है ही साथ ही साथ में एक उभर रही आर्थिक महाशक्ति भी है जिसके पास में अपने खुद के दो एयर क्राफ्ट करियर भी होने जा रहे है. तो ऐसे में भारत के पास में मजबूत दावेदारी करने के कई कारण भी है.

हालांकि अमेरिका के पास में ये पालिसी चेंज करने के बड़े कारण भी है. दरअसल सिर्फ भारत ही नही बल्कि जापान, कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देश भी वीटो पॉवर चाहते है और ऐसे में अगर एक भारत को ये दिया जाता है तो बाकी देश भी इसके लिए दबाव बना देंगे.

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