इधर राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदला, फिर जम्मू कश्मीर में भी लिया ऐसा ही फैसला

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किसी भी जगह या फिर देश की पहचान उसके नामो से ही होती है और वो जितने अधिक गर्व दिलाने वाले होते है वो उतने ही लम्बे समय तक लोगो के दिलो पर राज भी करते है. आपको मालूम ही होगा कि अभी हाल ही में देश के सर्वोच्च खेल जगत के पुरस्कार ‘राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ का नाम बदलकर के ‘मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार’ कर दिया गया है. ये अपने आप में बहुत ही बड़ी बात है और लग रहा है कि मोदी सरकार यहाँ पर ही रूकने वाली नही है बल्कि और भी आगे तक जाने की तैयारी कर रही है.

जम्मू कश्मीर में अनोखी पहल, सारे स्कूलों के नाम शहीदों के नाम पर होंगे
अभी हाल ही में जम्मू संभाग के कमिश्नर राघव लंघर ने एक पत्र लिखा है जिसमे उन्होंने अपने 10 जिलो के कमिश्नरो से सरकारी स्कूलों की पहचान करके उनकी लिस्ट तैयार करने के लिए कहा है. अब इन स्कूलों का नाम बदला जाएगा और इनका नाम बदलकर के उन सेना के सीआरपीएफ के जवानो के नाम पर किया जाएगा जो कश्मीर में लोगो की जान बचाते बचाते खुदको नही बचा सके और इसी धरती पर वीरगति को प्राप्त हो गये.

बच्चे अपने हीरोज को पहचाने, यही है लक्ष्य
स्कूलों का नाम इस तरह से शहीदों के नाम पर करने के पीछे का लक्ष्य यही है कि जो भी बच्चे आदि है और जो भी इस राज्य में रहते है वो उन हीरोज को पहचाने जिनकी वजह से आज वो इस धरती पर सुरक्षित और बेहतर जिन्दगी जी पा रहे है, जिन्होंने उनकी जिन्दगी बेहतर रहे इसके लिए अपनी जान की परवाह तक नही की है और आज उनके नाम पर जम्मू के स्कूलों का नाम करन होने जा रहा है जो एक अच्छा कदम है.

जब से जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटी है और इसे एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है उसके बाद से इस प्रदेश में काफी चीजे है जो बेहतर हुई है. जैसे लाल चौक पर तिरंगा फहराना हो, सैनिको के प्रति बर्ताव हो या फिर कई सारी चीजे है जो अपने आप में भारत के फेवर में होते हुए नजर आ रही है.

मगर सवाल यही है कि क्या वाकई में भारत पूरी पीढ़ी को अच्छे से देश के प्रति प्रेम करने वाली पीढ़ी के रूप में ट्रांसफॉर्म कर पायेगा? अगर ऐसा हो जाता है तो ये अपने आप में एक काफी बड़ी जीत के रूप में देखा जा सकेगा.

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