भारत के हाथ में आ गया हुकुम का इक्का, तालिबान ने भी जोड़ लिये हाथ

0
6759

आज की तारीख में अफगान में किस तरह की स्थिति है ये बात किसी से भी छुपी हुई नही है. जिस तरह से लगातार तालिबान अशरफ गनी की सरकार को पीछे धकेल रहा है उसके कारण से विश्व को फिर से काफी अधिक चिंता हो रही है और सबसे ज्यादा टेंशन भारत को हो रही है क्योंकि अभी हमारी वहां पर अरबो खरबों डॉलर की इन्वेस्टमेंट हो रखी है. मगर हाल ही में जो घटनाक्रम हुआ है वो अपने आप में काफी ज्यादा दिलचस्प है और ये भारत की काफी बदली पोजीशन को दर्शा रहा है.

पहले तालिबान लगा रहा था भारत पर आरोप, अब कहा भारत के प्रोजेक्ट्स को कुछ नही करेंगे
अब से लगभग हफ्ते भर पहले की ही बात है जब तालिबान के प्रवक्ता ने भारत पर आरोप लगाये थे कि इनके दिए हुए इक्वीपमेंट से अफगान सेना आम नागरिको और तालिबान को निशाने पर ले रही है. मगर अब एक हफ्ते के बाद में इन्ही लोगो ने भारत के प्रति अपना रूख बदलते हुए कहा कि हम भारत के प्रोजेक्ट्स को कुछ भी नही करेंगे बस भारत अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी का सपोर्ट करना बंद कर दे.

इस बदलते रवैये के पीछे की वजह है यूएन सिक्यूरिटी काउंसिल, भारत बना है अध्यक्ष
दरअसल भारत अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् का अध्यक्ष बना है और इस काउंसिल के अन्दर क्या और कैसे एजेंडे चलेंगे क्या प्रपोजल आयेंगे ये सब कुछ भारत पर ही निर्भर करेगा. ऐसे में अफगानिस्तान की रिक्वेस्ट पर भारत चाहे तो सुरक्षा परिषद् में तालिबान के खिलाफ रिजोल्यूशन पास करवा सकता है जिससे उन्हें डिप्लोमेटिक रूप से काफी अधिक नुकसान हो सकता है.

पीस कीपिंग फ़ोर्स भी बन सकती है रास्ता
भारत चाहे तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की मदद से अफगानिस्तान में यूएन की पीस कीपिंग फ़ोर्स की तैनाती भी करवा सकता है और अगर एक बार ऐसा हो गया तो फिर फिर तालिबान चाहकर के भी कुछ नही कर पायेगा क्योंकि इस सेना में दुनिया के हर देश के थोड़े थोड़े सैनिक होते है.

कही न कही ये जो हुकुम का इक्का भारत के हाथ में आ चुका है उसकी वजह से तालिबान तो घुटनों के बल आ गया है और अब बस देरी तो इसको इस्तेमाल करने की है जो जल्द ही होते हुए शायद हम लोग देख भी सकेंगे. कही न कही इससे भारत की इंटरनेशनल लेवल पर साख भी बढ़ेगी और दोस्त तो नए बनने ही वाले है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here