भारत से 30 गुना आगे निकला चीन, कहाँ पर हो रही है गडबडी

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आज भारत चीन से हर मामले में कम्पीट कर रहा है और लोग इस कारण से काफी अधिक प्रसन्न भी होते है कि चलो विश्व की बड़ी शक्तियों में हमारा नाम शुमार होता है. मगर जब हम आंकड़ो के मामले में हकीकत निहारने के लिए जाते है तो फिर यहाँ पर हमें कई बार मन मसोसकर के रह जाना पड़ता है और ये अपने आप में थोडा सा विचार करने के ऊपर मजबूर करता है कि आखिर गडबड कहाँ पर हो रही है? जबकि हम तन मन धन से देश के साथ में खड़े है.

ओलम्पिक में भारत के पास महज 2 मैडल, जबकि चीन 60 के पार
जहां एक तरफ भारत में मैडल लाने के लिए हर संभव कोशिश करने के बाद भी मैडल नही आ पा रहे है वही चीन में मैडल की झड़ी लग गयी है. इस बार के टोक्यो ओलम्पिक में भारत ने कुल 2 मैडल हासिल किये है जो अपने आप में गर्व करने वाली बात है लेकिन दूसरी तरफ हमारे ही पडोसी और कम्पीटीटर देश चीन की बात करे तो इस देश के खिलाड़ी अब तक 60 से अधिक मैडल हासिल कर चुके है जो भारत से लगभग 30 गुना अधिक है.

सरकार दे रही खूब अनुदान, फिर कहाँ कमी
भारत सरकार ने हाल ही में खेलो इंडिया केम्पेन भी लांच किया था. खूब अच्छे तरीके से कोच आदि प्रोवाइड किये जा रहे है और इसी के साथ में सरकार की तरफ से इस वित्त वर्ष में खिलाडियों के लिए 2500 करोड़ रूपये से भी अधिक का बजट दिया गया था. ये कही न कही काफी है मगर इतना पैसा खर्च करके भी भारत ओलम्पिक में सिर्फ 2 मैडल ही जीत पा रहा है तो फिर सवाल तो खड़े होते है?

इस मामले में अधिकतर दोष दिया जाता है ब्यूरोक्रेसी और सिस्टम पर. खिलाडियों के मेहनत पर बहुत ही अधिक लम्बे समय से पैसा ठीक तरीके से फ्लो में पहुँच पाने में बहुत ही देती हो जाती है. ये आरोप तो अक्सर लगते रहे है और इसके अलावा कई बार भाई भतीजावाद के मामले भी सामने आ जाते है जिसके कारण से असली खिलाड़ी आगे बढ़ ही नही पाते है.

जब पीटी उषा से इसी मामले में सवाल किया गया तो उन्होंने इसके जवाब में कहा ‘मैं तो सच बोलना चाहती हूँ क्योंकि मेरे माँ बाप ने हमेशा मुझे सच बोलने को कहा है. मगर अब मेने सच बोल दिया तो फिर ये बड़ा ही कडवा होगा इसलिए मैं इस मामले में पड़ना नही चाहती.’ यानी स्पोर्ट्स के क्षेत्र के अन्दर कुछ तो कडवा हो रहा है जिसे रिपेयर की जरूरत है. कब तक 130 करोड़ आबादी का देश सिर्फ 2 से 3 पदक लेकर जश्न मनाता रहेगा?

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