भारत पर पैदा हुआ भारी दबाव, तालिबान ने खेल दी है नयी चाल

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आपको ऐसे तो मालूम ही होगा कि पिछले काफी लम्बे समय से अफगानिस्तान में हालत धीरे धीरे अस्थिरता की तरफ बढ़ रही है और ऐसे में सबसे ज्यादा नुकसान किसी देश को हो रहा है तो वो है भारत. इसके पीछे का कारण है भारत का अरबो खरबों डॉलर का निवेश जो तालिबान के टेक ओवर होने के बाद में शायद किसी काम का नहीं रहेगा और भारत के कई फ्यूचर प्रोजेक्ट भी ठप्प पड सकते है. अभी हाल ही में तालिबान ने इसका सही शब्दों में एक तरह से सन्देश भी दे दिया है.

तालिबान का आरोप, भारतीय यंत्रो की मदद से अफगान सेना ने किये गलत काम
अभी हाल ही में तालिबान की वायुसेना ने एक अस्पताल को नष्ट कर दिया था क्योंकि उन्हें शक था कि इसमें तालिबान के लोगो का इलाज किया जाता है. इसके जवाब में तालिबान ने कहा कि यहाँ पर इन्होने आम नागरिको को नुकसान पहुंचाया है और इसमें उन्होंने उन इक्वीपमेंट का सहारा लिया गया है जो भारत के द्वारा इन लोगो को इस्तेमाल करने के लिए दिए गये है. इसके जरिये तालिबान अफगान के लोगो में भारत के लिए जो प्यार है उसे ख़तम करना चाहता है. यहाँ पर तालिबान ने भारत के नाम का इस्तेमाल करके अपने इरादे साफ़ कर दिए है कि वो अब अपने रास्ते अलग कर चुके है.

पहले भारत नही कर रहा था खुलकर विरोध, क्या पता बात बन जाए
कुछ समय पहले तक भारत तालिबान का खुलकर के विरोध कर नही रहा था क्योंकि हो सकता है कल को पूरे अफगानिस्तान को तालिबान टेक ओवर कर ले तो वहां पर अपनी इन्वेस्टमेंट को बनाये रखने के लिए हो सकता है भारत तालिबान से थोड़े डिप्लोमेटिक सम्बन्ध स्थापित कर ले लेकिन अभी ये जो कुछ भी हुआ है उसके बाद में इसके संभावना भी खत्म हो गयी है.

दरअसल ऐसा होने के पीछे की वजह एक ये भी है कि अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एंटनी ब्लिंकेन जब भारत आये थे तो उनके साथ में भारत ने भी अपने जॉइंट स्टेटमेंट में ये कह दिया था कि तालिबान अगर पूरे अफगानिस्तान को कब्जा भी लेता है तो भी हम उसकी वैधता को नही मानेंगे.

हो सकता है इसके बाद में दोनों के बीच की दूरियां और बढ़ गयी है और क्योंकि चीन व पाक की तालिबान से अच्छी दोस्ती है तो जाहिर तौर पर भारत के लिए ये एक नकारात्मक पॉइंट ही है. मगर आगे चलकर के क्या होगा इस पर हम अभी कुछ भी कह नही सकते है.

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