जिन्होंने भी कश्मीर में बदमाशी की सेना पर पत्थर फेंके, उनको लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है

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कश्मीर पिछले लम्बे समय से परेशानी से जूझता रहा है और ये चीज तो हम लोगो ने भी देखी है. कही न कही ये तो अधिकतर लोगो को नजर भी आता रहा है. जो भी लोग सेना के साथ में रहे है उन लोगो को मालूम है कि कश्मीर में क्या कुछ हुआ है और उनको कितना कुछ सहना भी पड़ा है. मगर जब बात आती है सरकार की तो अक्सर सरकारे इन लोगो के सामने घुटने टेक देती थी. पर लग रहा है अब ऐसा नही होने वाला है क्योंकि मोदी सरकार ने हाल ही में काफी बड़ा फैसला लिया है.

जिन लोगो की कश्मीर में हिस्ट्री रही गलत, उनको पासपोर्ट में सिक्यूरिटी क्लियरेंस नही मिलेगा और न ही मिलेगी सरकारी नौकरी
कश्मीर में वो लोग जो सेना के ऊपर पत्थर फेंकते है या फिर उनकी किसी भी तरह से एंटी नेशनल हिस्ट्री रही है उनको लेकर के सरकार ने एक नया नियम बनाया है और वो ये कि इन लोगो को अब कोई भी पासपोर्ट सिक्यूरिटी क्लियरेंस नही दिया जाएगा. इसके आलावा इन लोगो को सरकारी नौकरी न देने का निर्णय भी लिया गया है यानी इस तरह के लोगो के लिए अब विदेश जाना या फिर सरकारी नौकरी करना अपने आप में असंभव सा हो जाएगा.

इतिहास में दबती रही है सरकारे, पहली बार हुआ निर्णय
अब तक सरकारे पत्थर फेंकने वालो के आगे दबती रही है. अगर इन लोगो को हिरासत में लिया भी गया तो मानवाधिकार संगठनों या फिर वहां के राजनीतिक दलों के दबाव के आगे झुककर के केंद्र सरकारे इन लोगो को छोड़ देती थी और ये लोग फिर से उसी काम में लग जाते थे. मगर अब इनके ऊपर एक नया बोझ डाल दिया गया है कि अगर पत्थर फेंके तो न तो कही विदेश भागने का मौका मिलेगा और न ही कोई सरकारी नौकरी की उम्मीद है.

इसके जरिये सरकार एक मानसिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है जिससे कि लोग इस तरह की हरकतों से परहेज करे और सेना के लोग जो भी कश्मीर में सर्विस दे रहे है उन लोगो को भी काफी अधिक आसानी हो सके. हालांकि पिछले कुछ समय में ये सब कुछ कम जरुर हुआ है.

मगर अभी भी कुछ कह नही सकते है क्योंकि आये दिन कई जगहों पर सेना के जवान अपनी जान तो खो ही रहे है. जब तक भारत कश्मीर में जीरो केजुअलटी का लक्ष्य हासिल नही कर लेता है तब तक दिक्कते तो चलती ही रहेगी.

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