सुप्रीम कोर्ट से मोदी सरकार के लिए एक बुरी खबर आ रही है

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पिछले कुछ समय से मोदी सरकार के लिए अच्छा वक्त कही से भी चल ही नही रहा है. पहले तो करोना के कारण से उनके ऊपर और अधिक जिम्मेदारी आ गयी, फिर चीन का अग्रेसन और अधिक परेशान कर ही रहा था, ये थमा नही था कि अफगानिस्तान में तालिबान के टेकओवर के कारण भारत के अरबो डॉलर रिस्क पर आ गये है. ये सब क्या कम था कि अब मोदी सरकार पर एक और सुनवाई होने की नौबत आ गयी है जो कही न कही उनके पारदर्शिता और उनकी क्रेडिबलिटी के ऊपर संशय पैदा करवाने वाली भी हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट करेगा पेगासस मामले की सुनवाई, सरकार से होंगे सवाल
अभी हाल ही में कपिल सिब्बल ने वकील के तौर पर पेश होकर के एक याचिका दायर की है जिसमे उन्होंने सरकार की तरफ से पेगासस मामले पर लोगो की विपक्ष वालों की जासूसी करने का आरोप लगाया है. इस याचिका के सामने आने के बाद में पहली नजर में इस तरह की चीजे राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर रिजेक्ट हो जाती है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए एक्सेप्ट कर लिया है और इस पर सुनवाई की जायेगी.

निजता का अधिकार बन सकता है सरकार के लिए दिक्कत
अभी आपको मालूम हो तो ज्यूडीशरी की तरफ से निजता के अधिकार को मौलिक बना दिया गया है और ऐसे में अगर किसी की जासूसी करके किसी के बेसिक अधिकारों का हनन होता है तो फिर इसके कारण सरकार के ऊपर कई सारी जांचे बैठ सकती है और हो सकता है ज्यूडिशरी कुछ ऐसे आदेश भी दे दे जो सरकार को पसंद न आये.

मोदी को करना होगा पूर्ण बचाव, वरना अंतर्राष्ट्रीय साख हो सकती है खराब
पीएम मोदी को इस मामले पर पूर्ण रूप से बचाव करने और खुदकी सरकार को इस मामले में पाक साफ़ करने की बहुत ही अधिक जरूरत है क्योंकि ये मैटर इंटरनेशनल लेवल पर जा चुका है और ऐसे में भारत का सुप्रीम कोर्ट जो निर्णय देगा वो बहुत ही महत्त्वपूर्ण होगा और इससे सरकार के पारदर्शी होने का प्रमाण भी मिलेगा, तो जाहिर तौर पर सरकार इसे काफी गंभीरता के साथ में ले रही है.

अभी मोदी सरकार पर आरोप है कि उन्होंने राहुल गांधी समेत कई विपक्ष के नेताओ की कई अफसरों अदि की जासूसी की है और इनमें एक नाम पाकिस्तान के पीएम इमरान खान का भी शामिल है.

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