पढाई के नाम पर मजाक होगा बंद, मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

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जब से भारत में आजादी आयी है उसके आबाद से सरकारे जो भी आ रही है वो शिक्षा पर बहुत ही अच्छे तरीके से ध्यान दे रही है और ये तो हम लोगो ने भी बखूबी देखा ही है. मगर सही मायनों में अगर हम लोग बात करे तो कई जगहों पर शिक्षा तो बढ़ी है लेकिन शिक्षा के नाम पर कचरा भी बेचा जा रहा है और इस वजह से हम लोग हर जगह पर कुछ एक चीजे ऐसी होते हुए देख रहे है जो अप्रत्याशित है. यहाँ पर बात हो रही है शिक्षा की गुणवत्ता की जिससे कुछ भी ढंग का पैदा नही हो पा रहा है.

घटिया क्वालिटी के इंजिनियरिंग कॉलेजो को बंद करने पर काम शुरू
अभी देश में जहाँ देखो वहां पर इंजिनियरिंग कॉलेज खुल गये है. गाँव गाँव में लोगो को इंजिनियर बनाया जा रहा है लेकिन जब वहां पर जाकर के देखे तो वहाँ पर उनकी पढ़ाई के लायक न तो इंफ्रास्ट्रक्चर है, न ही कोई शिक्षक है और न ही लैब आदि है जिसकी मदद से उनको तैयार किया जा सके, बस किसी तरह से लोगो को डिग्री दे दी जाती है और ऐसा ही कई और प्रोफेशनल डिग्रीयो में भी देखने में आ रहा है.

ऐसे कॉलेज में सीट्स तो भरती नही और जहाँ पर भरती है वहां पर कोई काम होता नही है. इनको रोकने के लिए मोदी सरकार ने एक बीवीआर मोहन रेड्डी के नेतृत्व में एक कमिटी गठित की थी जिसकी मदद से अब तक देश में कई सैकड़ो इंजिनियरिंग कॉलेजो पर ताला लगा दिया गया है, कई में प्रथम वर्ष में एडमिशन लेने पर रोक लगा दी गयी है और तो और अब नए इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने पर भी कई तरह की रोके लगा अदि गयी है.

अब सिर्फ उन्ही को खोलने दिया जा रहा है जो लोग पिछड़े क्षेत्रो में शिक्षा में विकास करने का कार्य कर रहे है. बाकी को स्किल्ड शिक्षण संस्थान जैसे आईटीआई अदि की तरफ मोड़ा जा रहा है क्योंकि इससे अधिक रोजगार जनरेट हो सकता है और ये बेहतर शिक्षा के क्षेत्र भी है वरना इंजिनियर बनाने के नाम पर तो लोगो का मजाक बनाया जा रहा था.

अभी नयी शिक्षा नीति भी की गयी है शुरू
हाल ही में एक नयी शिक्षा नीति भी शुरू की गयी है जिसके अनुसार बच्चो के पढ़ाई के मामले में कोई भी कोताही नहीं बरती जायेगी और थ्योरी की बजाय प्रैक्टिकल पढ़ाई के ऊपर अधिक फोकस किया जायेगा ताकि भारत का भविष्य बेहतर बन सके.

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