मायावती के रास्ते पर चल पड़े अखिलेश यादव, योगी को नुकसान पहुंचाने का मास्टरप्लान

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इन दिनों में उत्तर प्रदेश अपने आप में काफी बड़ा बदलाव महसूस कर रहा है क्योंकि चुनाव काफी तेजी के साथ में नजदीक आ रहे है और इसी के कारण से बहुत सारे ऐसे लोग भी है जो ये कह रहे है या फिर सोच रहे है कि आने वाले वक्त में काफी कुछ है जो एक तरह से बदलने जा रहा है और जो वोट बैंक को लेकर के लोगो की प्राथमिकताएं है वो भी बदल रही है. अभी हाल ही में मायावती ने उसे क्लियर कर दिया था और अब लग रहा है कि अखिलेश यादव खुद भी उसी राह पर चल पड़े है.

अखिलेश ने बनाई पांच ब्राह्मण नेताओं की कमिटी, वोटरों को लुभाने पर काम
अखिलेश यादव ने हाल ही में एक पांच बड़े ब्राह्मण नेताओं की कमिटी बनाई है जिसका काम समाजवादी पार्टी की छवि को ब्राह्मणों के बीच में बेहतर बनाना होगा. सूत्र बताते है कि इनकी मदद से अखिलेश यादव प्रदेश में रह रहे ब्राह्मन वोटरों को साधने की कोशिश करेंगे जिनका एक बहुत ही बड़ा रोल यहाँ के चुनावों में होता है और इस बात में किसी को भी संशय नही है.

राज्य का लगभग दसवा हिस्सा बनाते है ब्राह्मण, निभायेंगे चुनावों में अहम् भूमिका
अभी की बात करे तो डाटा के हिसाब से ब्राह्मण वोटर इस राज्य में लगभग 12 प्रतिशत के आस पास है और इनके द्वारा कई दर्जनों सीट्स है जो निर्धारित की जायेगी. यानी काफी समय से जिस जाति पर कोई भी ध्यान ही नही दे रहा था उस पर अब हर पार्टी की नजर पड़ रही है और अब ऐसा लग रहा है मानो सबसे ज्यादा पूछा उन्ही को जा रहा है. कही न कही ये पार्टियों के यू टर्न के जैसा भी है.

बात सिर्फ यही पर ही नही रूकती है. समाजवादी पार्टी ने तो ये तक घोषणा कर दी कि अगर उनकी सरकार आती है तो परशुराम जयंती को मनाया जायेगा और उस दिन अवकाश भी रहेगा. इस तरह की तमाम बाते है जो अखिलेश यादव के आने वाले केम्पेन में नजर आ सकती है जो काफी महत्त्वपूर्ण भी रहेगी.

मायावती बहुत पहले ही शुरू कर चुकी है काम
मयावती को बहुत पहले ही इस बात का अंदाजा हो गया था कि सिर्फ दलित वोट उन्हें सत्ता तक नही पहुंचा सकते है और इसी कारण से उन्होंने सतीश चन्द्र मिश्रा को पहले ही ब्राह्मण वोटो को अपनी तरफ करने के लिए जोर लगाना शुरू कर दिया है.

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