रूस का वो कदम, जिसके बाद भारत का अमेरिका के पक्ष में जाने में ही फायदा है

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अभी विश्व स्तर की राजनीति बहुत ही अधिक बदल चुकी है और कही न कही लोगो को इन चीजो की उम्मीद रहती नही है जो हम लोग होते हुए देख रहे है. अगर हम लोग अभी की स्थिति की बात करे तो भारत पिछले कई वर्षो से इस उधेड़बुन में था कि रूस के साथ में तटस्थ रहा जाए या फिर यूरोप और अमेरिका से साठ गाँठ करके उनके पक्ष में पूरी तरह हो जाये? अभी हाल ही में जो घटनाक्रम हुए है उसके बाद में तो भारत को काफी कुछ क्रिस्टल क्लियर नजर आने लगा है.

तालिबान मुद्दे पर रूस का भारत की मदद करने से इनकार, अमेरिका पूरी नही लेकिन कुछ कुछ मदद कर रहा है
अभी आपको मालूम ही होगा कि भारत का अफगान में कई बिलियन डॉलर का निवेश हो रखा है और ऐसे वक्त में जब तालिबान ने अफगान का कब्जा कर लिया तो भारत ने रूस से मदद मांगी थी और कहा था कि वो अपने प्रभाव की मदद से कुछ करे, मगर रूस ने खुल्लेआम भारत की मदद करने से मना कर दिया था. सेना उतारनी तो बहुत दूर की बात है रूस ने भारत को ये सलाह दे दी कि तालिबान एक हकीकत है और इसे भारत स्वीकार करे.

वही दूसरी तरफ बात करे अगर हम लोग अमेरिका की तो ये पूरी तरह से बदलाव की राह पर है और ये हम लोग भी देख सकते है. अमेरिका चाहे अफगान छोड़कर के जा रहा है लेकिन हवाई रास्ते से उसने अभी भी अपने फाइटर तैनात कर दिए है और वहां पर वो दुश्मनों को हवाई रास्ते से ख़तम कर रहा है. इससे भारत को कुछ राहत तो मिल ही रही है, मगर रूस तो बातो से भी राहत देने को तैयार नही था.

इंटरनेशनल फोरम पर भी सपोर्टिव नही नजर आ रहा रूस
अभी हाल ही में इंटरनेशनल फ़ोरम पर भी रूस भारत के लिए अधिक सपोर्ट करता नजर नही आ रहा है. अभी हाल ही में भारत के खिलाफ जब एक प्रस्ताव आया तो रूस ने उसे वीटो नही किया, जबकि भारत के नए दोस्त फ्रांस ने वीटो करके भारत को यूएन में बचाने का कार्य किया था. अमेरिका भी ऐसे ही भारत की मदद कर रहा है.

यही नही रूस बार बार भारत को चीन से साझेदारी बढाने और क्वाड के करीब न जाने के दबाव भी बना रहा है, इससे नजर आता है कि अब धीरे धीरे भारत और रूस के बीच में दूरियां बढ़ रही है जो दुबारा शायद ही कभी खत्म हो पाए.

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