बंगाल का होगा विभाजन? मोदी सरकार के इस कदम से बढ़ी ममता की चिंता

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पश्चिम बंगाल अपने आप में एक बहुत ही बड़ा राज्य है और हर कोई बहुत ही अच्छे से जानता है कि आज इस राज्य में क्या कुछ हो रहा है और किस तरह से चुनावों के बाद में भाजपा कार्यो की धरपकड़ भी देखने को मिली है. खैर इन बातो को साइड में भी रख दिया जाये तो अभी यहाँ पर और भी कुछ एक समस्याएँ है जिन पर राज्य सरकार ध्यान नही दे रही है और अब उन पर केंद्र की तरफ से पैनी नजर डाली जा रही है. अभी के लिए एक बड़ा कदम ऐसा ही उठाया नजर आता है.

जिस सांसद ने की नार्थ बंगाल बनाने की वकालत, उसे बनाया मोदी सरकार में मंत्री
भारतीय जनता पार्टी के ही सांसद जॉन बारला ने अभी हाल ही में अपने एक बयान में कहा था कि पश्चिम बंगाल के नार्थ इलाको जैसे दार्जिलिंग आदि से वहां की सरकार बहुत ही मोटी कमाई करती है लेकिन इन राज्यों को विकास कार्यो के मामले में बिलकुल ही उपेक्षित रखा जाता है. इस कारण से हम चाहते है कि इसे एरिया को अलग करके एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया जाये.

यहाँ पर एक तरह से तुलनात्मक स्थिति लद्दाख की तरह नजर आती है जहाँ पर भी कभी जम्मू कश्मीर की सरकार ध्यान नही देती थी और इस कारण से वहां पर लोग काफी अधिक बुरा और उपेक्षित महसूस करते थे. उनका विकास हो नही रहा था और इसी के चलते हुए उनको भी एक अलग केंद्र शासित प्रदेश दे दिया गया. अब ऐसी ही कुछ मांग नार्थ बंगाल के लोग भी कर रहे है.

वैसे भी उनका कल्चर हो या फिर कई सारी चीजे हो वो कलकत्ता से बिलकुल भी नही मिलती है और शायद यही वो कारण जिसके चलते हुए खूब जमीन और टूरिज्म होते हुए भी सरकार हो या फिर प्रशासन हो उन पर अधिक ध्यान नही दिया जाता है. अब वहां के नार्थ बंगाल की वकालत करने वाले सांसद को इस तरह से यूँ मंत्री बना देना कुछ तो इशारा कर ही देता है.

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