मोदी सरकार आयी भारी चिंता में, एस जयशंकर को तुरंत भेजा रूस

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अभी के लिए भारत में वैसे तो चीजे ठीक चल रही है लेकिन एक दिक्कत पडोसी में आ गयी है और इसके कारण से भारत के इकनोमिक इंटरेस्ट कह लीजिये या फिर सीधे तौर पर सामरिक इंटरेस्ट कह लीजिये हर तरह से भारत पर बन गयी है. ऐसे टाइम में भारत की मदद कोई कर सकता है तो फिर रूस ही है और कोई भी भारत के लिए कुछ कर नही सकता है क्योंकि अमेरिका तो पहले ही अपने हाथ छिड़क चुका है. चलिये पूरी खबर जान लेते है कि आखिर हुआ क्या है?

भारत की अफगानिस्तान में बिलियन डॉलर की इन्वेस्टमेंट पर रिस्क, रूस ही निकाल सकता है रास्ता
अभी के लिये आपको मालूम ही होगा कि अफगानिस्तान में से अमेरिका सेना वापिस लौट चुकी है और उनके वापिस जाते ही एक के बाद में एक शहर लगातार तालिबान कब्जा रहा है और अभी हाल ही में उसने भारत के अफगान में बनाये हुए एक बड़े बाँध पर भी कब्जा कर लिया है. ऐसे में भारत ने वहां पर जो बिलियन डॉलर की इन्वेस्टमेंट की हुई है सब पर रिस्क आ गया है, यही नही इससे सेन्ट्रल एशियाई देशो पर भी मुश्किल है जिसमे ताजिकिस्तान प्रमुख है.

भारत के लिए व्यापार के लिए और चाहबार पोर्ट के इस्तेमाल के लिए यहाँ पर स्थिरता काफी जरुरी हो गयी है और इसी के लिए अभी हाल ही में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर तुरंत प्रभाव से रूस निकल पड़े है जहाँ पर संभवतः वो रूस में अपने समकक्ष विदेश मंत्री और संभवतः पुतिन से भी मिलेंगे और अफगान में जो कुछ भी हो रहा है उस पर अपनी तरफ से चिंता व्यक्त करेंगे. रूस का तालिबान और अफगान में अच्छा ख़ासा प्रभाव है जिसकी  मदद से वो ऐसा होने से रोक सकता है.

संभव तो ये भी है कि अगर भारत अप्रोच करे तो ताजिकिस्तान में अपने बेस को रूस एक्टिवेट करके तालिबान पर कुछ नकेल कस सकता है और इससे संभव है भारत ने ये जो अरबो खरबों रूपये अफगान और उसके आस पास में खर्च किये है वो कही न कही बच जायेंगे.

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