ईरान ने दिया भारत को बहुत बड़ा धोखा, तोड़ दिया सालो का भरोसा

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अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध हमेशा से ही एक नींव पर चलते है और उस नींव को हम विश्वास का नाम देते है. कही न कही हर कोई उसी आधार पर ही कार्य भी करता है और दुनिया भर के देश एक दुसरे के साथ में व्यापार भी विश्वास के आधार पर करते है, मगर हाल ही  में ईरान ने जो किया है वो विश्वास को डस्टबिन में डाल देने के जैसा है और भारत इस मामले में चाहकर के भी कुछ कर नही पा रहा है. चलिए पूरा मामला ठीक तरह से जान लेते है.

आज से 20 वर्ष पहले भारत ने लिया था ईरान की कई संभावित आयल फील में तेल ढूँढने का अधिकार
आज से 20 वर्ष पहले जब भारत में वाजपेयी सरकार थी तब उन्होंने ईरान के आस पास के गल्फ के समुद्री इलाके में तेल और प्राकृतिक गैस खोजने का अधिकार लिया और कहा कि आपकी कम्पनी ओत खोज नही पायी लेकिन हमारी कम्पनियां बहुत अधिक बड़ी है, वो खोज लेगी. जब तेल मिल जाएगा तो हम लोग आपस में बांटकर के उससे पैसा कमाएंगे.

भारत की कम्पनी ओएनजीसी ने यहाँ पर तेल खोज लिया और ये देखकर के ईरान खुद भी हैरान था कि यहाँ पर वो हमेशा से तेल और गैस खोजने की कोशिश में था लेकिन नही मिला. खैर अब जब मिल गया तो बात चली कि चलो आपस में बाँट लेते है, इसी बीच अमेरिका ने ईरान पर कई प्रतिबन्ध लगा दिए जिसके तहत वो दुसरे देशो के साथ में व्यापार नही कर सकता था. ऐसे में भारत की ये डील ठन्डे बस्ते में चली गयी.

हाल ही में ईरान ने भारत को इस आयल फील्ड से बाहर कर दिया, दिया 400 मिलियन डॉलर का झटका
अभी हाल ही में ईरान ने अपनी एक सरकारी कम्पनी को भारत द्वारा 400 मिलियन डॉलर खर्च करके खोजी गयी इस आयल फील्ड का कॉन्ट्रैक्ट दे दिया और ओएनजीसी समेत भारत की सारी कम्पनियों को इस डील से बाहर कर दिया. ये अपने आप में काफी बुरा था क्योंकि भारत की कम्पनियों ने यहाँ पर बहुत मेहनत की काफी पैसा बहाया और जिन्दगी के बीस साल लगा दिए और ईरान ने एक झटके में सब कुछ खत्म कर दिया.

भारत चाहकर के भी कुछ कर नही सकता भारत आज चाहकर के भी इस कडवे घूँट को पी रहा है क्योंकि भारत की पहले से ही ईरान में काफी अधिक इन्वेस्टमेंट हो रही है, चाबहार पोर्ट बन रहा है तो ऐसे में ईरान से सम्बन्ध खराब करके नुकसान उठाना पड़ेगा, ऐसे में एक सवाल ये भी है क्या गारंटी है ईरान आगे के प्रोजेक्ट में भी ऐसे धोखे नही देगा?

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