बंगाल में हालात बेहद खराब, उठी राष्ट्रपति शासन की मांग

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अभी फ़िलहाल बंगाल में जिस तरह की स्थिति बनी हुई है वो अपने आप में काफी अधिक चिंता का विषय है. चुनावी परिणाम 2 मई को घोषित किये गये और इस घोषणा के बाद में जो कुछ भी बंगाल में हुआ वो अपने आप में चिंता का विषय रहा. जिस तरह से कार्यकर्ताओं की जान ली गयी. लोगो के घर तक नही छोड़े गये, चाहे वो विधायक प्रत्याशियों के घर ही क्यों न हो? विभिन्न सामने आ रही मीडिया रिपोर्ट्स को देखते हुए एक बात तो साफ़ हो गयी है लॉ एंड आर्डर की स्थिति अभी अच्छी है नही.

मीडिया वर्ग से उठी मांग, राष्ट्रपति शासन ही बचा सकता है
अभी हाल ही में ऑप इंडिया के वरिष्ठ पत्रकार रहे, डू पॉलिटिक्स के माध्यम से इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारिता करने वाले और बंगाल चुनाव को जमीनी स्तर पर कवर कर चुके पत्रकार अजीत भारती ने वर्तमान में चल रहे बंगाल के हालातो पर चिंता जताई है और इसे बिलकुल ही बंगाल में लॉ एंड आर्डर का फेलियर भी माना है, ऐसे में उन्होंने माना है कि बंगाल में अभी वो स्थिति है जिसमे केंद्र सरकार को अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की जरूरत है.

वो लोग जो अपनी इच्छा से किसी पार्टी को सपोर्ट करते है उनको जीने का और स्वतंत्रता के साथ में जीने का अधिकार है, ऐसे में जब दर्जनों लोग इस कारण से अपनी जान से हाथ धो रहे है क्योंकि वो कभी बीजेपी को सपोर्ट कर रहे थे तो ये अपने आप में लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ जाने जैसा है. ऐसी स्थिति में एक बात कही न कही नजर आती है कि केंद्र के हाथ में ही अंत में शक्ति है जो लोगो की जान की रक्षा कर सकती है.

हालांकि इस तरह के एक्शन पर केंद्र सरकार को जनता से और विपक्षी पार्टियों से आलोचना का डर भी रहता है. जाहिर तौर पर राष्ट्रपति शासन लगा देना कोई ऐसा खेल नही है जो कही भी कैसे भी कर दिया जाए. स्थिति आगे चलकर के खराब भी हो सकती है.

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