सुब्रमण्यम स्वामी ने की है इस पीएम मोदी से ये क़ानून बदलने की मांग, कांग्रेस उतरी विरोध में

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भारतीय जनता पार्टी के नेता और जाने माने व्यक्ति सुब्रमण्यम स्वामी जी की बात अगर हम बात करते है तो वो हमेशा से ही बहुत ही बड़े बुद्धिजीवी माने जाते रहे है जिनको न सिर्फ राजनीति बल्कि देश के अन्दर क्या कार्यकलाप चल रहे है और कितना कुछ बदलाव किया जा सकता है उसकी भी समझ है और इस बात में किसी को कोई संशय भी नही है. अगर हम लोग अभी की बात करते है तो हाल ही में स्वामी जी ने जो मांग की है वो कई लोगो को बहुत ही ज्यादा परेशान कर रही है.

प्लेसेज ऑफ़ वरशिप एक्ट 1991 को बदलवाना चाहते है स्वामी
स्वामी जी ने मोदी सरकार से कई बार ये दरख्वास्त की है और वो कई सालो से ये कोशिश कर रहे है कि प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट को बदल दिया जाए या फिर समाप्त कर दिया जाए जिसके अनुसार आजादी के बाद में जो भी मंदिर मस्जिद आदि जिस भी स्थिति में है उसी स्थिति में रखने का प्रावधान है. यानी अगर इतिहास का कोई प्रमाण मिलता है फिर भी किसी को तोड़कर के कोई दूसरी बिल्डिंग नही बनाई जायेगी, हालांकि राम मंदिर इसमें अपवाद जरुर था.

पहले मोदी सरकार से की थी विनती, अब सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचे स्वामी जी ने मोदी सरकार से अपील की है कि वो इसे बदले और जब वहाँ से इतना कुछ रिस्पोंस ख़ास देखने को मिला नही तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की तरफ रूख किया और इस क़ानून को गलत बताया है क्योंकि यहाँ पर अगर कोई सही भी है तो भी उसकी जमीन पर किसी और कब्जा होने की संभावना रहती है अगर वो पिछले सत्तर साल से किसी की जमीन को दबाकर के धर्म के नाम पर बैठा हुआ है.

ज्ञानवापी मस्जिद पर मंडराएगा इससे खतरा, काशी विश्वनाथ मंदिर होने की है दलील
दरअसल काशी में एक ज्ञानवापी नाम की मस्जिद है जिसको लेकर के हिन्दू पक्ष का कहना है कि यहाँ पर कभी बहुत ही खूबसूरत काशी विश्वनाथ मंदिर हुआ करता था जिसे राम मंदिर की तरह तोड़कर के मुगल शासको ने अपनी मस्जिद बनवा दी. अब हम इसे वापिस लेना चाहते है और तमाम तरह की बाते है जो हो रही है. कही न कही बात में लोगो को दम तो लग रहा है लेकिन अगर कोर्ट चाहता भी है तो इस प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट के कारण हिन्दुओ को मंदिर वापिस दिलवा नही सकता है, ऐसे में इस क़ानून को ही बदल देने की मांग उठी है.

ऐसे में कांग्रेस और कई विपक्षी दल के लोग है जो इस मामले में मोदी सरकार से ये आश्वासन मांग रहे है कि इस क़ानून को छेडा नही जायेगा, इससे मुस्लिमो को अच्छा नही लगेगा. वही स्वामी जी तो अपने काम पर लगे हुए ही है.

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