भारत ने सऊदी अरब को सबक सिखाने के लिये एक और बड़ा फैसला लिया है

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भारत कभी एक वक्त में बाहर की विदेशी शक्तियों पर बहुत ही अधिक निर्भर करता था और हमें काफी दबकर के भी चलना पड़ता था क्योंकि एक वक्त में हमारी अर्थव्यवस्था भी उतनी अच्छी नही थी और अंतर्राष्ट्रीय रिश्ते भी कमजोर थे, लेकिन वो स्थिति नही रही और इस वजह से भारत किसी के दबाव में नही आता है. अभी हाल ही में भारत और सऊदी अरब के बीच में जो तेल के दामो को लेकर के कहासुनी हुई है वो कुछ इसी तरह की है और ये भारत की असली ताकत को दर्शा देती है.

भारत का फैसला, अब सऊदी से तेल आयात में करेंगे 36 प्रतिशत की कटौती
भारत अब तक सऊदी अरब पर कच्चे तेल को लेकर के बहुत ही ज्यादा निर्भर था जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल आ पाता था. मगर हाल ही में भारत ने एक बड़ा और काफी तगड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत अब भारत सऊदी से तेल आयद में 36 प्रतिशत की कटौती करेगा, इससे सऊदी को कई बिलियन डॉलर का घाटा होगा और भारत आगे चलकर के इस कटौती को और भी अधिक या फिर पूरा ही बढ़ा सकता है जिससे सऊदी को हर वर्ष कई बिलियन डॉलर की आमदनी रूकेगी. ये एक बड़ा झटका होगा.

तेल की कीमते मनमाने ढंग से बढाने को लेकर नाराज है भारत
दरअसल भारत और सऊदी ने लॉकडाउन के दौर में समझौता आपसी बातो में किया था कि अभी आपकी तेल की कीमते गिर रही है तो चिंता मत करो हम आपका तेल फिर भी वाजिब दाम पर खरीदेंगे, बस जब स्थिति सामान्य होगी तो आप मनमाने ढंग से कीमते मत बढ़ाना लेकिन जैसे ही दुनिया भर से लॉकडाउन हटा तो हाल बुरे हो गये और सऊदी ने तेल की कीमते आसमान पर पहुंचा दी.

भारत ने जब इस पर सऊदी को अपना वादा याद दिलाया तो सऊदी विदेशी मंत्रालय ने काफी बदतमीज लहजे में ये कह दिया कि अगर भारत को तेल चाहिए तो वो अपने जो रिजर्व में रखा हुआ आयल है उसका इस्तेमाल क्यों नही करता है? इस तरह की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए धर्मेन्द्र प्रधान ने सऊदी के इस बयान को बहुत ही अनडिप्लोमेटिक सा बताया था.

अमेरिका और नोर्वे जैसे देशो से तेल की होगी अब खरीद
अब भारत तेल की खरीद को लेकर के एक जगह पर निर्भर रहना नही चाहता है इसलिए अलग अलग जगहों पर से तेल की खरीद होगी जिसमे ईराक, नोर्वे, नाइजीरिया और अमेरिका जैसे देश शामिल होंगे. ये देश भी तेल का अच्छा और कम कीमत में उत्पादन करते है. नोर्वे तो भारत सरकार पर तेल बेचने के लिए लम्बे समय से डोरे भी डाल रहा है.

तो भारत तो हर तरीके से फायदे में ही है, अगर कोई नुकसान में जा रहा है तो वो सऊदी अरब ही है और उनके लिए ये चीज विश्वसनीयता के नजरिये से भी बुरी ही होने वाली है.

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