विकट संकट में फंसा देश, मोदी और शाह दोनों हुए परेशान

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एक तरफ जहाँ पर मोदी और शाह के ऊपर बंगाल के चुनाव की टेंशन है वही दूसरी तरफ एक और दिक्कत है जो आन खड़ी हुई है. वैसे तो सरकारों का हर दिन कही न कही चुनौती से भरा हुआ रहता है और परेशानियो से भरा हुआ ही रहता है पर अभी की बात करे तो अभी इन दिनों में मोदी सरकार जिन दिक्कतों से जूझ रही है वो और भी ज्यादा परेशान करने वाली है क्योंकि अभी जो दिक्कत है वो मोदी के अपने हाथ की भी नही है.

देश में फिर से आने लगे 1 लाख से ज्यादा केस, उत्परिवर्तन दिखा चुका है करोना
अभी देश में हालात पिछले दो से चार दिनो में पूरी तरह से बिगड़ चुके है. 4 अप्रेल को जब केसों की गिनती की गयी तो सिर्फ एक दिन में ही 1 लाख से अधिक केस आये है. ये पिछली बार जो लहर आयी थी उससे भी बुरी स्थिति बताई जा रही है और इसमें सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि इस बार करोना में उत्परिवर्तन भी हो गया है जिससे इसका फैलाव पहले से काफी अधिक प्रतिशत तेजी के साथ में हो रहा है.

लगातार चल रही हाई लेवल मीटिंगे, उठाये जा रहे सख्त कदम
प्रधानमंत्री कार्यालय में अभी इस दिक्कत को लेकर के लगातार हाई लेवल मीटिंग्स चल रही है. लगातार बड़े बड़े सीनियर ब्यूरोक्रेट इस पर अपने अपने हिसाब से चीजो को रख रहे है और समझ रहे है. वाकई में ये काफी बड़े लेवल पर प्रयास तो हो रहे है लेकिन एक दिन में एक लाख केस आना मतलब ये बहुत ही भारी समस्या है और कोई भी सरकार इसे बड़े ही आराम से या फिर दुसरे शब्दों में कहे तो चुटकियो में नही सुलझा सकती है.

लॉकडाउन की कोई संभावना नही, लेकिन सख्ती बढ़ेगी
अगर हम लोग अभी की बात करे तो स्थिति खराब हुई है पर सरकार की अभी लॉकडाउन लगाने की दूर दूर तक कोई भी मंशा नही है क्योंकि लोगो के रोजगार और व्यापार पहले ही चौपट हो चुकी है और भारत की अर्थव्यवस्था अभी बहुत ही बुरे हाल में है. ऐसे में एक और लॉकडाउन लोगो के हाल बहुत ही बुरे या फिर कहे हद से ज्यादा बुरे कर सकता है इस बात में कोई भी शक नही है.

ऐसे में सरकार सख्ती लगा सकती है जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में रोक, राज्यों में आवाजाही पर रोक, स्कूल कॉलेज में रोक और तमाम चीजे है जिनसे संक्रमण की गति को कम किया जा सकता है वो चीजे हो सकती है तो पहले ही अपडेट रहे.

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