ईसामसीह के बारे में क्या बोल गये पीएम नरेंद्र मोदी, ट्वीट कर कही बात

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आम तौर पर एक हिन्दूवादी नेता के तौर पर देखा जाता है और ये जाहिर सी बात है कि होता ही है. कही न कही जिस तरह से पीएम की छवि पिछले पंद्रह सालो में गढ़ी गयी है वो वैसी ही है और इसी के चलते कभी वो महादेव तो कभी माता रानी की पूजा करते हुए नजर आते है, लेकिन इसका मतलब ये नही है कि प्रधानमंत्री मोदी दुसरे धर्मो को लेकर के सॉफ्ट नही है. अभी हाल ही में उन्होंने ट्वीट कर यहाँ पर कुछ ऐसी ही बाते कही है.

गुड फ्राइडे पर किया ईसा मसीह को याद, जमकर किया सम्मान और तारीफ़
आज इसाइयों का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण त्यौहार है जिसे गुड फ्राइडे के रूप में देखा जाता है. प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर ट्वीट करते हुए कहा ‘गुड फ्राइडे हमें इसामसीह के संघर्ष और उनके बलिदानों की याद दिलाता है. वो एक परफेक्ट दया के अवतार थे. उन्होंने खुदको जरुरतमंदों और बीमारों की मदद के लिए समर्पित कर दिया था.’ प्रधानमंत्री मोदी के इस ट्वीट के बाद में इसाई समुदाय ने उनकी काफी तारीफ़ की है.

प्रधानमंत्री मोदी के अधिकतर दोस्त भी है इसाई समुदाय से
आज की तारीख में प्रधानमंत्री मोदी के जितने करीबी दोस्त रहे है चाहे वो डोनाल्ड ट्रम्प हो, बायडन हो या  फिर कई देशो के अध्यक्ष चाहे पुतिन आदि ही क्यों न हो? आज प्रधानमंत्री मोदी की इसाई और यहूदी धर्म से काफी करीबी बढ़ चुकी है और दोनों ही एक तरह से अब्राहमिक धर्म ही कहे जाते है.

क्यों मनाया जाता है गुड फ्राइडे
गुड फ्राइडे वैसे तो इसाइयों में काफी पावन पर्व है लेकिन आम तौर पर लोग इसे सिर्फ इतना ही जानते है, इसके पीछे की घटना के बारे में अधिकतर लोगो को मालूम नही है. आज से दो हजार साल पहले इसाह मसीह येरूशलम में लोगो को ईश्वर के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते थे. लोगो उन पर बच्चो को बहकाने का आरोप लगाया और उन पर कई आरोप लगे.

इस पर वहां के राजा ने उनको खत्म करने का फैसला सुनाया जिसके बाद में उनको क्रॉस पर लगाकर के कीले लगा दी गयी. इस पर उनका निधन हुआ और फिर वो वापिस आ गये थे क्योंकि वो एक ईश्वर पुत्र थे. अब ये सब तो कहानियाँ है कितनी सच और कितनी झूठ लेकिन तब से इस पर्व को गुड फ्राइडे के रूप में मनाया जाने लगा.

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