इस पार्टी ने तोडा बीजेपी से नाता, शिवसेना और अकाली दल के बाद एक और पार्टी हुई अलग

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अभी अगर हम अभी पिछले समय की बात को देखे तो फिर भाजपा ने अपने कुछ नए सहयोगी बनाये है तो कई सहयोगी अपने एजेंडे के चलते हुए पार्टी से दूर भी हुए है और ये तो आपने भी खूब ज्यादा देखा होगा और ऐसा आम तौर पर तब ज्यादा होता है जब आपके राजनीतिक हित अलग हो जाए. शिवसेना और अकाली दल इसके सबसे बड़े उदाहरण है जो अपने आप में अभी हाल ही में गठबंधन से अलग हुए थे और इसके बाद में बीजेपी को लगा कि हाँ दलों का आना जाना तो लगा ही रहता है.

मगर इन सबके बीच में एक और बड़ी खबर आयी है और ये खबर राजस्थान से है. दरअसल किसान कानूनों के विरोध में राजस्थान में बीजेपी की सहयोगी पार्टी आरएलपी ने अपना समर्थन पार्टी से वापिस ले लिया है और अब आगे से अलग हो जाने की बात कह दी है.

इसका ऐलान नागौर से सांसद और पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने किया कि किसान कानूनों के विरोध में आरएलपी बीजेपी से अपना समर्थन वापिस ले रही है. बीजेपी के लिए वैसे इससे कोई सीटो का नुकसान नही हो रहा है लेकिन माना जाता है कि इस पार्टी के पास ठीक ठाक किसान और जाट वोट बैंक है जो इनको वोट करता है तो ये थोडा सा वोट शिफ्ट होने की चिंता जरुर बढ़ा सकता है लेकिन इतना  बहुत कुछ ख़ास इफ़ेक्ट इसका पड़ते हुए नजर आ नही रहा है.

भाजपा ने अभी तक इस पर किसी भी तरह की कोई प्रतिक्रिया नही दी है और न ही वो इस पर कुछ भी बोलना चाह रहे है. हालांकि हनुमान बेनीवाल के लम्बे समय से बीजेपी के राज्य स्तरीय नेताओं के साथ में कुछ न कुछ मतभेद तो चल ही रहे थे और इन्होने भी कही न कही आगे में घी डालने का काम किया.

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